सत्य का दूसरा पक्ष: भारत की नदियों में प्लास्टिक संकट विकास की कहानियों पर विश्वास कर लेते हैं, लेकिन नदियों की कराहती हुई "अपनी कहानी" सुनने से इनकार कर देते हैं। हम प्लास्टिक की सुविधा के "झूठ" को अपना लेते हैं, लेकिन इसके अदृश्य विनाश के "पक्ष" को अनदेखा कर देते हैं। भारत आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ वह दुनिया का सबसे बड़ा प्लास्टिक प्रदूषक बन चुका है, जो प्रति वर्ष लगभग 93 लाख टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न करता है, जो वैश्विक कुल का लगभग 20 प्रतिशत है । यह रिपोर्ट उस "दूसरे पक्ष" का विस्तृत विश्लेषण है जिसे सुनने और समझने की आवश्यकता है। संकट का वैश्विक और राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य: सुविधा का भ्रम प्लास्टिक प्रदूषण आधुनिक सभ्यता का वह "झूठ" है जिसे हमने अपनी जीवनशैली का अनिवार्य हिस्सा बना लिया है। भारत में प्लास्टिक कचरे की समस्या भयावह दर से बढ़ रही है, जिसका मुख्य कारण तीव्र शहरीकरण, बढ़ती जनसंख्या और उपभोग क...